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Kis chij ki jaldi hai use mujhe samjh nahi aata

तेरे शहर का हर युवा ये कह रहा

बिखरी देखी सीख बुहारी की

इस से बड़ा महोबत में इंतकाम क्या होगा

कोन सुनता है शायर के जज्बात इस दुनिया में

अब ये जिस्म तो क्या है बस एक जिन्दा लाश है,

त्योहार पे इस बार भी घर ना जा पाया मैं

हर घर में बस एक कमरा कम है

"सच" तुम कितना बदल गई हो..!