इश्क़ की है बीमारी और दवा भी इश्क है
मगर ये तो बता इस दवा से आराम क्या होगा
सुना है बड़े ऊंचे घराने में दिल लगाए हो
अब दिल को क्या मालूम इसका अंजाम क्या होगा
यूँ बुरा भला न कहो तुम्हे अलग होना है तो हो जाओ
तुम्हारी तीखी बातों से ज्यादा ज़हरीला कोई बाण क्या होगा
जो वादे तुमने मेरे साथ किये थे वो किसी और के साथ निभा रहे हो
बहुत देखे बेवफा मगर तुझसे बड़ा बेईमान क्या होगा
वो आये हमारी कब्र पर और कहा तुमसा प्यार किसी से नही मिला
इस से बड़ा महोबत में इंतकाम क्या होगा
जो कोई अकेले में उदासी में गुनगुनाये मेरी ग़ज़लें
इस से बड़ा शहर में किसी का नाम क्या होगा
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