सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक कमरा कम है
यूँ तो है हजारों प्यार करने वाले मुझको
आँखें बस सिर्फ एक ही की नम है
बरसात के मेंढक आते जाते रहते हैं यूँ तो
जरूरत पड़ने पर काम आने वाले कम हैं
यूँ तो लोग सूरज की रोशनी में भी बहाने बना देते हैं
कहने वाले कह देते हैं चांद की चांदनी कम है।
सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक कमरा कम है
मैंने खून औऱ पसीना मिला दिया घर की चिनवाई में
भाइयों ने कह दिया इसमे हमारा हिसा कम है
दुःख इस बात का नही किसने किसको सिखाया
बिक जाएगी पूर्वजो की जमीन इस बात का गम है
मिलाओ तुम भी कभी कन्धा से कन्धा कभी
देखते हैं किसमे भाईचारा तुड़वाने में दम है
सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक कमरा कम है
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