बिखरी देखी सीख बुहारी की

मैंने टूटे फूटे मकान मैं

बिखरी देखी सीख बुहारी की

जिसके खुद के घर ने खाण के दाने नही

मैंने खेतां मैं धान लगाती

देखी बहु बिहारी की


रे जिसके आगे बिखरी पड़ी रह

न्यारे न्यारे ढाल की जूती


मैंने एक जोड़ी जूती पहरण खातर तरसती

देखी बहु चमारी की


न्यू तो सारे ढाल के गहने धरे रह

चोगर्दे के दुकान मैं

पर दूसरा के गल मैं हार देख के जलती

देखी बहु सुनारी की


न्यू तो माटी के वा बर्तन बना दे न्यारे न्यारे ढाल के

पर अपने घर मे माटी मैं रुलदी 

देखी बहु कुम्हारी की


साबत दिन मेहनत करके बर्तन भांडे रोड पे धरके

2 2 रपिया खातर दुनिया ते लड़ती

देखी बहु लुहारी की


अपनी झोपड़ी ने भी महल जिसा राखे वा

महीने महीने पाछे मैंने घर बदलती देखी बहु बंजारी की


 बामण बाणिये का घमंड चूर चूर होते देख्या

न्यू बोले एक या सारी इसी तीसी होगी कोरोना बीमारी की


क्षत्रिय ने जुवा खेलन मैं ध्यान दे लिया

लोगां के उधार के ताने सुन लूकती देखी मैंने बहु जुआरी की

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