"सच" तुम कितना बदल गई हो..!

 वो चली गई, 

जीने के लिए 

उसकी यादें पास रह गयी,

जैसे बंद मुठी में 

फिसलती रेत सा 

अहसास रह गई..!! 


fir bhi dost


तुने मुझे कुछ दिया नहीं,मैंने कुछ तुझे से लिया नहीं,

तू मेरी यादो से जुदा नहीं, मैं तेरी यादो में कभी बसा नहीं..!


मेरा कुछ हिस्सा तुझ में रह गया है, उसे दफन कर देना,

तेरा कुछ हिस्सा मुझ में रह गया है, उस पर एक मंदिर बना ने देना ..!


तेरी बाहों में न सही, आखिरी पल तेरी यादों में बसर करने देना,

जिंदगी को तो शुकून दिया नहीं, अब शुकून से तो मरने देना.....!!!!!!!



तुम कितना बदल गई हो,

"सच" तुम कितना बदल गई हो..!

कहाँ तुम सह पाती थी मेरी ख़ामोशी को,

मेरी उदासी तुम्हारी जान निकाल देती थी..!

और अब .....अब तुम कितना बदल गई हो..!

सुना है तुम आजकल बहुत उदास हो....

किसी ने तुम्हे चंद रोज़ पहले मेरे हंसने की खबर जो दे दी थी..!!


यूँ तुम ख़बरों पे ना जाया करो...

मेरी खुशियाँ तो मेरे यकीन की दौलत थी,

सही से याद करो वो सब तुमने आखिरी रोज़....

आखिरी रोज़...अपनी दर पर रखवा कर ही मुझे रवाना किया था..!!


मेरे खुदा मैंने खुशियों की कोई बलि नहीं दी तुने कभी की भेंट चढवा ली थी,

मेरी खुशियाँ भी इज्ज़त की तरह ही लुटी है....अब कभी वापिस नहीं आएगी....!!


खैर बदला तो मेरे यहाँ भी बहुत कुछ है...सच कहूँ तो बहुत कुछ क्या सब कुछ बदल गया है,

सब कुछ बदल गया है .......सिवाय तुम्हारी यादों के..!!


खैर....हो सके तो..

जानती हो मेरी गज़लें विधवा सी हो गई है,

तुम जो नहीं पढ़ती हो इन्हें...किसी रोज़ फुर्सत में ये सब पढ़ लो तो शायद ये अमर सुहागन हो जाए..!!


जानती हो मेरी ये जिंदगी भी अब बेमानी हो गई है,

अब तुम जो साथ नहीं रही हो...किसी और जन्म में मुझे मिल लेना..शायद वो जन्म कामयाब हो जाए,


वैसे अगर मन हो तो जरा सोच लेना..

मैं इंतज़ार में हूँ...पिछले साल ऐसा ही कुछ कह के पुकारा था तुम्हे,

शायद तुम सुन ना सकी थी या शायद सुन के अनसुना कर दिया था..!

जानती हो ये बरस भी गुजरने को है फिर से बारिश की रुत भी आने को है,

ये तपती लू जिस्म को जला नहीं पा रही है...जाने क्युं जलती खवाइशों पे उम्मीद की बारिश हो ही जाती है..!!

जाने क्यूँ मन कहता है, इस बार तुम आओगी...फिर बारिश में खाली पानी नहीं मोहब्बत भी बरसेगी..!


वैसे कभी बात हो ना हो लेकिन....वादा करो,

वादा करो मेरी राख को एक बार तुम छूवोगी जरूर...."सच" मुझे गंगा में बहने से अच्छा तुमसे लिपटना लगेगा..!!

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