तेरे शहर का हर युवा ये कह रहा

 तेरे शहर का हर युवा ये कह रहा

के जिस जिस ने तुझे चाहा वो कहीं का ना रहा


कुछ यूँ भीड़ लगी थी आशिको की तेरे दिल में

ना मैं वहाँ से कभी निकाला गया और ना कभी रहा


कुछ किस्मत ऐसी थी कुछ आर्थिक स्थिति से तंग था

मैं हर पल मरता रहा लेकिन जीता रहा


कमाने की उम्र में मैं क्यों तेरा दीवाना हो गया

जानता था मिल नही पाओगी तुम मुझे पर आस में रहा


मैं तरसता रहा उस से एक मुलाकात करने के लिए

वो नए नए बहाने बनाती रही मैं सुनता रहा


कुछ इस तरह मैं तेरी चाहत के भर्म में रहा

धूल आखों झोंकी गयी और मैं चश्मा साफ करता रहा


शायद उसको दिलो से खेलने में मजा आने लगा था

लेकिन ऐसी भी क्या ऐयाशी जो तू एक का भी न रहा

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