कोन सुनता है शायर के जज्बात इस दुनिया में

 तन्हाई बेबसी का है आलम क्या हाल बताऊ दीवाने का

हर किसी ने देखा दुःख शमा का कोन जाने दर्द परवाने का,,,


कभी शिदत कभी कुर्बत कब कब न माँगा मैंने तुझे,,,

जहा छोड़ा था तुने मुझे उस मोड़ पे इन्तजार किया तेरा आने का,,,


तेरी हर बात याद आती है मुझको बड़ा सताती है,,,

अंदाज ही कुछ ऐसा था उस शख्स का मुझे रुलाने का,,,


तरसती जाती थी मेरी हसरते तेरे करीब आने के लिए

कहाँ से सीखा ये हुनर यूँ इशारो में हाल बताने का,,,


कभी सीने से मेरे दर्द कम हुआ ही नही

अंदाज ही कुछ ऐसा था उसका ज़ख्मो पे मरहम लगाने का,,,


मुझे लाजवाब होना पड़ा था जब उसने मुझे छोड़ा,,,

अंदाज ही कुछ ऐसा था उसका हाथो पे से हाथ हटाने का,,,


कोन सुनता है शायर के जज्बात इस दुनिया में "aashu"

खुद से ही कह देता है आशिक हर दर्द दीवाने का,,,

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