मैं भीष्म पितामह बरगा तू पवित्र गंगे सी मेरी माँ | Shayari on maa

 मैं भीष्म पितामह बरगा तू पवित्र गंगे सी मेरी माँ

एक आखरी बे, मल मल के नहवा देगी के माँ।


मैं बनके राम चन्द्र जी सा, तू शबरी सी देखी जा बाट मेरी

आऊं जब मैंने छक छक बेर ख्वा देगी के माँ।


आड़े युद्ध की बादल छाए रह स, नींद मैंने ना आवे माँ

इस गोली बारी की आवाज मैं मैंने लोरी गा के सुवा देगी के माँ।


आज दुष्मना की छाती चीर के, बचाणी स मैंने या धरती माँ

एक बे विदुला माई के जु, युद्ध खातर हौसला बंधा देगी के माँ


मेरा बाबू भी इस देश खातर शाहिद होया था, बस उड़े ही मैंने जाना है।

मेरे बाबू के गैल मीरा भी एक दीपला जला देगी के माँ।


तेरे दूध का कर्ज चुकाना स, हर गोली पे मुस्कुराना स

अगले जन्म मैं भी मैंने बेटा बना लेगी के माँ।


मैं याद तू उस काले आसमान मैं तैने तारा बन की दिखूंगा।।

घर आऊं जब उस तिरेंगे मैं लिपटा, ऊपर ते तेरा आँचल भी उड़ा देगी के माँ?

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