किसी और के नाम का सिन्दूर खराब लगता है मुझको | Sad Shayari

 तुम्हारे पैरों की पायल तो अच्छी लगती है मुझको

लेकिन तेरे गालों को चूमता हुआ झुमका खराब लगता है मुझको


तुम्हारी गोरी कलाई में चूड़ियां खनकती हुई अच्छी लगती हैं मुझको

लेकिन चूड़ी वाले को थमाया हुआ हाथ खराब लगता है मुझको


तुम्हारी नींदीयाती आँखों ने काजल अच्छा लगता है मुझको

लेकिन उनमें छलका हुआ आखँ का आँसू खराब लगता है मुझको


तुम्हारे माथे की बिंदिया तो चाँद सी लगती है मुझको

पर किसी और के नाम का सिन्दूर खराब लगता है मुझको


तुम्हारी हँसी की खनक से तो दिल बहल जाता है मेरा

मगर मजबूरी में हँसी ओढ़ा चेहरा खराब लगता है मुझको


तुम्हारे पाँवों में महावर की लाली बहुत अच्छी लगती है

मगर मेहन्दी में छिपाया हुआ किसी और का नाम खराब लगता है मुझको


तुम्हारा हर साज, हर श्रृंगार पूजनीय है मेरे लिए,

मगर जो तुम्हें ख़ुश न रखे — वो प्यार, वो संसार खराब लगता है मुझको


तू सजे तो जैसे साज छिड़े बादलों में और सावन उतर आए ज़मीन पर,

मगर किसी और के लिए तेरा सजना खराब लगता है मुझको


तुम्हारे होंठों पर लगी लाली फूलों का एहसास लगता है मुझको,

पर बेबसी में तेरे लबों का खामोश होना खराब लगता है मुझको




तेरी सुंदर उंगलियों से लिखे खत अब तक संभाल कर रखे हैं मैंने,

मगर मजबूरियों में लिखा गया अलविदा — खराब लगता है मुझको

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