कहाँ तक चीर खींचेगा दुशासन हार जाएगा | Most Beautiful Shayari

 हमें विश्वास है व्यभिचारी शासन हार जाएगा,

हमारे हौसलों से फिर ये रावण हार जाएगा,


तुम्हें तो द्रौपदी सी शक्ति का साहस जुटाना है,

कहाँ तक चीर खींचेगा दुशासन हार जाएगा,


मेरे नैहर की भेजी काँच की चूड़ी जो है उससे,

मेरे ससुराल के सोने का कंगन हार जाएगा,


समर्पण की कोई तुलना नहीं उस प्रेम जोगन के,

इसी इक बिन्दु पे राधा से मोहन हार जाएगा,


मैं प्रेम में पीछे हट जाऊ तो सूली पर लटका देना

तुम हाथ न छोड़ना दुश्मन जमाना हार जाएगा


हमारे पाँव के छालों को मत आँक कमज़ोरी से भगवान

मैं तेरे दर आना नही छोडूंगा तेरा दरबार हार जाएगा।


और यूंही सह लेते हैं खामोशी से बेज्जती अपनी

तेरा हर ज़ुल्म, हर छल, हर उपहास हार जाएगा।


तेरी सभ्यता ने कितना ही कर दिए हो कपड़े अपने छोटे,

मेरे सादे घूंघट के आगे तेरा आज के दौर का लिबास हार जाएगा।


मैं अगर मौन भी रहूँ तो भी तू डर जाएगा,

मेरे मन के अथा प्रेम से तेरा संन्यास हार जाएगा।


यह प्रेम और सन्यास की लड़ाई तो सदियों की है

आयी जो मेनका तो विश्वामित्र फिर हार जाएगा


वो रोकते रहेंगे तुम्हे सत्य बोलने से फिर भी

तुम कलम मत छोड़ना एक ये अखबार हार जाएगा

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