के हर कोई आजाता है दिल मे बिना पूछे
हमने भी हारकर दिल के बाहर चौकीदार रखे
वो कम्बखत भी हैरान है आज तल्ख मुझसे
समझ नही आ रहा की किसे अंदर रखे किसे बाहर रखे
जो रहा दिल के बाहर उसे भुला ना पाएं
जो रहा दिल के अंदर उसे ना कभी प्यार से रखे
जो रहा दिल के अंदर उसे गुमान आ गया
कहने लगा कि मेरे अलावा तू कोई और क्यों रखे
दिल तो दिल है प्यार के लिए तरसता है
समझ नही आता किसे अंदर रखे किसे बाहर रखे
कह दिया मैंने एक दिन चौकीदार को
दिल के जो अंदर है उसे हमेशा के लिये अंदर ही रखे
जो अंदर था वो दिल तोड़ के बाहर आ गया एक दिन
मिल गया उसे एक बड़ा दिल, बोली टूटे दिल को संभाल के रखे
के अब ना आये दिल में कोई, ऐसी मैंने चौकीदार को सलाह दी है
की अब से न कोई बाहर रहे न कोई अंदर रखे
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