रोम रोम में राम है तेरे, वो तो तुझसे दूर नही,
देख सके न आंखे उनको, उन आंखों में नूर नही,
देखेगा तू मन मंदिर में, ज्ञान की ज्योत जलाएगा,
निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पाएगा।।
राम नाम है राम से बड़ा, उसका तुम सदा जाप करो
मोह माया के मत भागो पीछे, उसका सदा तुम त्याग करो
आंतरिक मन की खुशी का प्यारे, जब एहसास तूझे हो जाएगा
निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पायेगा।
बात बात पर चिंता करते, मात पिता का ध्यान नही
राम भी अकेले पड़ जाते जब, होते पास हनुमान नही
खुश हो जाएंगे श्री राम प्रभु जब, उन जैसा भक्त मिल जाएगा
निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पायेगा
पैसो का क्यों घमण्ड हो करते, वो तो आता जाता रहता है।
राम चन्द्र के बाण से ही तो, घमण्डी रावण मरता है
सारी चिंताएं श्री राम को देदो, उनपर भी बाण चल जाएगा
निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पायेगा।
राम सुग्रीव के जैसे ही तुम, निभाओ अपनी मित्रता
स्त्रियों का असम्मान करोगे तो, फल रावण जैसा मिलता
लक्ष्मण रेखा से जो तुम निकले बाहर, जब रावण हर ले जाएगा
तब निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पायेगा
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