सोचा था हमने अपनी तकदीर खुद लिखेंगे
हमने तो अपने ही पैरों पे कुल्हाड़ी मारी है।
पैसे कमाने का ही खेल होता तो हम भी दिखा देते
हमने तो हमेशा जीती बाजी हारी है।
दुनिया इश्क़ लड़ाए तो कोई कुछ नही कहता बस
एक हमारी ही तो दुश्मन ये जहां सारी है
हर कोई कर लेता है गुरुर अपनी महोब्बत पे
सोच लेता है इस बार वाली महोब्बत सबसे न्यारी है
तुम भी ले लेना बराबर की कसमे वादे उनसे
कहना उसको, वफादारों की तरफ स ये जनहित में जारी है
एक हम ही तो नही इश्क़ में इनितहाँ देने वाले
लेकिन इस बार तुम्हारी बारी है
आदमी तो गुजर जाता है अपनी हर हदो से
परिवार की वजह से बलिदान देदे वो तो एक नारी है
वो ना दे बलिदान परिवार का तो ये समझना प्यार नही है
वो बेवफ़ा नही है ऐ दोस्त, वो सबकी लाडो प्यारी है।
वो ना आ पाए तुम्हारे पास तो ये समझ लेना कि वो बेवफा है
परिवार का बोझ है उसपे वो सबकी राजदुलारी है।
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