श्रृंगार को रहने दो तुम


श्रृंगार को श्रृंगार कैसा
पल भर की दूरी को इंतजार कैसा
बेमौसम बे वक़्त आजाना

श्रृंगार को रहने दो तुम
जैसे हो वैसे आजाना

बालो की उलझट किये
होठो पे मुस्कराहट लिए
मुझसे मिलके मत शर्माना

श्रृंगार को रहने दो तुम
जैसे हो वैसे आजाना

तेरी बदन की खुशबू आने दो
मेरी साँसों में महक जाने दो
तुम इतर मत लगा के आना

श्रृंगार को रहने दो तुम
जैसे हो वैसे आजाना

तेरी नींदियाती अखियों में
बेसबर इनमे डूब जाने में
तुम काजल लगा के मत आना

श्रृंगार को रहने दो तुम
जैसे हो वैसे आजाना

कानो की बाली निकाल कर
सर पर चुनी डालकर
छुपते छुपाते आजाना

श्रृंगार को रहने दो तुम
जैसे हो वैसे आजाना

Comments